Thursday, December 17, 2009

तुम किसी के ख्वाब की तामीर हो

तुम किसी के ख्वाब की तामीर हो
या किसी तामीर की नूरे नज़र
दिल की धड़कन है तुम्हारी बेरुखी
रंगों राहत है तुम्हारी इक नज़र

तू है मेरी आरजू की जिंदगी
रंग तेरा गंदमी मलबूस सा
होंठ में तेरे नशा ऐ मैकदा
आँख में तेरी है ज़न्नत की फ़िज़ा

तुम कभी जो आए राहे क़दमों से
रंग बिखरे सारा चमन खिल उठा
आस के पंखों पे तैरी जुस्तजू
इक नज़र तूने कभी देखा किया

तेरी आंखों में ये गुस्से की कमान
होंठ की लर्जिश छुपा सकती नहीं
तेरे माथे पे पडी ये सलवटें
राजे दिल मुझ से छुपा सकती नहीं

No comments: