Thursday, December 17, 2009

राह में खडा हूँ मैं

राह में खडा हूँ मैं रहबर गुज़र ना जाना
इक दो घड़ी की खातिर वादा तो निभा जाना

वाज़ है की तुम को शिकवे हज़ार होंगे
कुछ दर्द गम का होगा दिल अश्कबार होंगे
ये ठीक है कि दुनिया तुम को सदा ना देगी
क़यामत हो फिर भी हम रहे पुकार होंगे

वादा ऐ कसम तुम को हम से खफ़ा ना जाना
इक दो घड़ी की ............

गम नहीं जो मिलने से मजबूर हैं हम
कब इतने पास थे हम अब इतनी दूर हैं हम
लेकिन वफ़ा की दुनिया आबाद ही रहे गी
दिल पास पास होंगे गो कितनी दूर हों हम

मुहब्बत का वास्ता है बदनाम कर ना जाना
इक दो घड़ी की ...........

दिल ढूंढ़ता है तुम को बैचैन सी नज़र से
कभी ढूंढे तुम तो जानिब कभी देखता उधर से
नक्शे कदम भी तेरे कहीं पर नज़र ना आयें
आख़िर आवाज़ तो दो आ जाऊं मैं जिधर से

दिल ढूँढता है तुझको दिल को रुला ना जाना
इक दो घड़ी की .............

कहीं तुम गुज़र ना जाना दामन बचा के मुझ से
आख़िर तो ये बता दे क्या खता हुई है मुझ से
मेरी सदा में दम है आना पड़े गा तुम को
दूर कब तलक तुम आख़िर रहो गे मुझ से

ये सदाए दिल है आना पड़े गा आना
इक दो घड़ी की ...........

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