Thursday, December 17, 2009

नगमा - ए -दिल Nagma-e- dil

गीत गाये यूँ हजारों वक़्त की मजबूरियों के
नगमा दिले मजबूरियों का फिर भी गाया गया

Geet gaye yun hazaaron vakt ki mazboorion ke
nagma dile mazboorion ka phir bhi gaya na gaya

(I sang many songs of helplessness of times
still I could not sing the song of helpness of my heart)

9 comments:

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

मनोज कुमार said...

अच्छी रचना बधाई। ब्लॉग जगत में स्वागत।

shama said...

Sundar panktiyan!

kshama said...

गीत गाये यूँ हजारों वक़्त की मजबूरियों के
नगमा दिले मजबूरियों का फिर भी गाया न गया
Waah!

नारदमुनि said...

narayan narayan

radhasaxena said...

Khubsurat panktiya.

रचना गौड़ ’भारती’ said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई। मेरे ब्लोग पर आपका स्वागत है।

madan gauria said...

Thanks. It is really very encouraging to receive your appreciation.Thanks once again.

avinash kumar singh said...

Really nice..keep it up mate...