Thursday, December 17, 2009

मानवता संचार करो तुम Manvata sanchar karo tum

मानव के अंतर तारों में और विश्व के कण कण में
जीवन की नीरव संध्या में हर आकुल मानव के मन में
आशा का प्रचार करो तुम
दानवता संहार करो तुम
मानवता संचार करो तुम

व्यथित निराश अपरिपूर्ण धरा थर्राई प्रलय प्रकम्प्पन से
आकाश गूँज उठा आहों से निराशायों से करुण क्रंदन से
अविरल निरंतर निश दिन
समता का प्रचार करो तुम
मानवता संचार करो तुम

हर तरफ़ प्रलय की आग धधकती व्याकुल मानवता चीख रही है
पददलित निराश्रित अनाथों पर ना जाने कया बीत रही है
भारत के भूखे अभागे अनजान
सपूतों का उद्धार करो तुम
मानवता संचार करो तुम

तुम ही उठो नव संदेश दो नवजागरण ला दो तुम
दानवता विध्वंशक मानवता प्रचारक नव केतन फहरा दो तुम
जीवन दीप की बुझती लौ में
जीवन का संचार करो तुम
मानवता संचार करो तुम

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