Thursday, December 17, 2009

पैमाना ऐ गमे ज़िन्दगी

पैमाना ऐ गमे ज़िन्दगी लबरेज़ है दोस्त
हैरां हूँ कि फिर भी जिए जा रहा हूँ मैं

ना साकी ना महफिल ना मय ना मैखाना
फिर भी शराबे गम पिए जा रहा हूँ मैं

नाशाद गमे दिल कि बरबादियाँ ना पूछ
ये पूछ कि क्यों जिए जा रहा हूँ मैं

हसरते नाकाम का कुछ गम नहीं मुझ को
हसरते दीदार लिए जा रहा हूँ मैं

वक्त की रफ़्तार के ज़ख्मों का जिक्र क्या
इस ज़िन्दगी का ज़हर पिए जा रहा हूँ मैं

होते हैं चर्चे आज भी तेरी बेवफाई के
हैरां हूँ कि फिर भी तेरा नाम लिए जा रहा हूँ मैं

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